दुनियाभर के बाजारों में भूचाल के बीच क्रूड ऑयल की कीमतें अगस्त 2021 के बाद सबसे निचले स्तर पर आ गई है। अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते टैरिफ वॉर, ओपेक प्लस (OPEC+) के उत्पादन बढ़ाने के फैसले और निवेशकों की घबराहट ने कच्चे तेल की कीमतों को गिराकर रख दिया है। ब्रेंट क्रूड शुक्रवार को 64.62 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 61.09 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ- जो पिछले छह महीनों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है।
ट्रेड वॉर की चोट
अमेरिका द्वारा नए टैरिफ लगाने के 24 घंटे के भीतर ही चीन ने भी 34% आयात शुल्क लागू करने की घोषणा कर दी। इससे ग्लोबल ट्रेड में तनाव बढ़ा और निवेशकों ने तेल से पैसा निकालना शुरू कर दिया।
OPEC+ के फैसले से और झटका
OPEC+ ने मई से तेल उत्पादन को 4.11 लाख बैरल प्रतिदिन तक बढ़ाने का प्लान बनाया है, जिससे क्रूड पर दबाव और बढ़ गया। जानकारों का कहना है कि यह फैसला वैश्विक बाजार के लिहाज से टाइमिंग के लिहाज से खतरनाक है।
क्या भारत में सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?
भले ही कच्चे तेल की कीमतें गिरी हों लेकिन भारत में पेट्रोल-डीजल की दरें टैक्स और अन्य लागतों पर निर्भर करती हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि कीमतें लंबे समय तक नीचे रहीं तो इसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है, हालांकि इसमें समय लग सकता है।
क्या आगे और गिरेगा तेल?
गोल्डमैन सैक्स ने 2025 के लिए ब्रेंट का टारगेट घटाकर 66 डॉलर और WTI का 62 डॉलर कर दिया है। दूसरी ओर रिस्टैड एनर्जी का मानना है कि मौजूदा गिरावट अस्थायी है और कीमतें जल्द 70 डॉलर पार कर सकती हैं।
हालांकि, एनर्जी कंसल्टेंसी फर्म रिस्टैड एनर्जी (Rystad Energy) के विश्लेषकों ने उम्मीद जताई कि तेल की कीमतें फिर से उछाल ले सकती हैं। उनके अनुसार, प्रतिबंधों और शुल्कों के कारण आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे कीमतें जल्द ही 70 डॉलर के पार जा सकती हैं। रिस्टैड के कमोडिटी मार्केट प्रमुख मुकेश सहदेव ने कहा, “तेल की कीमतें ज्यादा देर तक नीचे नहीं रहेंगी।”